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  • गांधी फैज-ए-आम कालेज में शासन की मंशानुरूप वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने महर्षि वाल्मीकि और उनके द्वारा रचित रामायण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

    दिनांक: 24 अक्तूबर 2018
    गांधी फैज-ए-आम कालेज में शासन की मंशानुरूप वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने महर्षि वाल्मीकि और उनके द्वारा रचित रामायण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। 
    संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य डा. जमील अहमद ने सरकार के इस क़दम की सराहना की। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की चर्चा करते हुए कहा कि संस्कृत साहित्य की परिधि में किसी अन्य ग्रन्थ ने भारत के जनसाधरण को इतना अधिक प्रभावित नहीं किया है जितना कि रामायण ने। संसार के सम्पूर्ण साहित्य में रामायण के अतिरिक्त अन्य किसी ग्रन्थ को यह गौरव नहीं प्राप्त नहीं है कि शताब्दियों तक किसी राष्ट्र की विचारधारा एवं काव्य को इतनी गहराई से प्रभावित कर सके। संस्कृत के अनेक कवियों ने वाल्मीकि की कृति से कथानक ग्रहण किये एवं अपने काव्यों और नाटकों में उनका नियोजन किया। संस्कृत ही नहीं परवर्ती भाषाओं की कविता को भी इस काव्य से प्रेरणा मिली। महत्वपूर्ण मध्ययुगीन कवि तुलसीदास का रामचरित मानस भी इससे अछूता नहीं है। 
    डा. फैयाज़ अहमद ने रामायण के ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए आधुनिक समय में प्रासंगिता का हवाला दिया। उन्होंने लोक प्रसंगों की प्रामाणिकता पर विचार किया।
    डा. सीमा शर्मा ने कहा कि वाल्मीकि दृढ़ इच्छा शक्ति एवं संकल्प की प्रतिमूर्ति थे। उनका जीवन हमें सामान्यता से ऊपर उठकर देवत्व कैसे प्राप्त किया जाए, इसका संदेश देता है।
    डा. नीलम टंडन ने कहा कि रामायण में संपूर्ण जीवन दर्शन का प्रतिपादन मिलता है, जो आज के विश्रृंखलित  समाज को जोड़ने में हमारी मदद कर सकता है।
    डा. स्वप्निल यादव ने वाल्मीकि  के रामायण और तुलसी के रामचारित मानस की तुलना करते हुए विभिन्न पहलुओं को उजागर किया। 
    डा. शिव प्रताप सिंह ने कहा कि रामायण राम की संघर्ष यात्रा का दस्तावेज़ है।
    इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के मध्य ‘आधुनिक समाज में वाल्मीकि रामायण का महत्व एवं उपादेयता’ विषयक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बी.ए. तृतीय वर्ष की शक्ति धारिणी पांडेय को प्रथम, बी.एससी. प्रथम वर्ष के ललित हरि मिश्रा को द्वितीय तथा बी.ए. तृतीय वर्ष की अनुज्ञा मिश्रा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। काजल यादव, फरहा अंसारी, अभिषेक को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के समन्वयक डाॅ0 अब्दुल मोमिन रहे। निर्णायक मंडल के सदस्य डाॅ0 युक्ति माथुर, डाॅ0 फैयाज़ अहमद, डाॅ0 सीमा शर्मा थे।
    कार्यक्रम का सफल संचालन डा. मंसूर सिद्दीक़ी ने किया। इस अवसर पर डाॅ0 नईमुद्दीन सिद्दीकी, डाॅ0 सैयद नोमान, डाॅ0 मो0 तैयब, डाॅ0 ख़लील अहमद, सै. अनीस अहमद, डाॅ0 मोहम्मद तारिक़, डाॅ0 सै. सुहेल अख़्तर नक़वी, डाॅ0 अरीब अंजुम रहमान, डाॅ0 मोहम्मद साजिद ख़ान, डाॅ0 सलीम अहमद, डाॅ0 जी0ए0 कादरी डाॅ0 कहकशां, डाॅ0 मो0 शोएब, डाॅ0 अरशद अली, डाॅ0 रियाज़ अहमद, डाॅ0 तजम्मुल हुसैन, डाॅ0 शमशाद अली, डाॅ0 काशिफ नईम, डाॅ0 परवेज़ मुहम्मद, मो0 रिज़वान सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
     
     
    डाॅ0 जमील अहमद
    प्राचार्य
    गांधी फैज-ए-आम कालेज

    Posted by GF College / Posted on Oct 24, 2018

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