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  • गांधी फ़ैज़-ए-आम काॅलेज के प्राचार्य द्वारा गठित टीम ने खुटार ब्लाक की खुले में शौचालय मुक्त पांच ग्राम पंचायतों पिपरिया बिरसिंगपुर, अठकोना, चमराबोझी, चांदपुर और कोल्हूगाढ़ा के 11 गांवों का दो दिवसीय सर्वे करके अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस टीम में जंतु विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ0 शिव प्रताप सिंह तथा लाइब्रेरी एवं सूचना विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ0 आकाश सिंह एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आशिक अली सम्मिलित रहे।

    13.12.18
    गांधी फ़ैज़-ए-आम काॅलेज के प्राचार्य द्वारा गठित टीम ने खुटार ब्लाक की खुले में शौचालय मुक्त पांच ग्राम पंचायतों पिपरिया बिरसिंगपुर, अठकोना, चमराबोझी, चांदपुर और कोल्हूगाढ़ा के 11 गांवों का दो दिवसीय सर्वे करके अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस टीम में जंतु विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ0 शिव प्रताप सिंह तथा लाइब्रेरी एवं सूचना विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ0 आकाश सिंह एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आशिक अली सम्मिलित रहे। 
    प्राचार्य ने सरकार के इस क़दम की सराहना करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों के लिए स्वच्छता से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती खुले में शौच करने (ओडी) की प्रथा को समाप्त करने की है। गाँव के तकरीबन 65 प्रतिशत लोग खुले में शौच करते हैं जिसकी वजह से मानव मल पर्यावरण को प्रदूषित करता है। ग्रामीण परिवेश में मानव मल के उत्सर्जन से ग्रामीण समुदाय का स्वास्थ प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है। मानव मल में भारी संख्या में रोगों के कीटाणु होते हैं जिससे बीमारियाँ फैलती हैं और मानव तंत्र व भोजन में इन कीटाणुओं के प्रवेश करने की प्रबल संभावना होती है।
    जनपद के खुटार एवं पुवांया ब्लाक के ओडीएफ घोषित ग्रामों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत सरकार द्वारा बनवाए गए शौचालयों की गुणवत्ता के सत्यापन हेतु दिसंबर के प्रथम सप्ताह में मंडलायुक्त बरेली मंडल के 18 अधिकारियों को ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी क्रम में मंडलायुक्त द्वारा खुटार ब्लाक की 5 ग्राम पंचायतों के 11 ग्रामों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत बनवाए गए शौचालयों की गुणवत्ता की जांच क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी बरेली-मुरादाबद परिक्षेत्र बरेली को प्रदान की गई, जिसे उनके द्वारा यह दायित्व जी.एफ. कालेज को सौंपा गया। 
    आवंटित ग्रामों का भौतिक सत्यापन कर लौटी टीम ने बताया कि किसी भी गांव को तब तक ओडीएफ घोषित नहीं किया जा सकता है कि जब गांव के प्रत्येक परिवार के पास स्वयं का अथवा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत बनवाया शौचालय नहीं है। लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थितियाँ इसके उलट हैं। वस्तुतः सरकार तक सही आंकड़े नहीं पहुच पा रहे हैं जिससे सभी ज़रूरतमंदो को शौचालय नहीं मिल पा रहे हैं। कारणों की चर्चा करते हुए टीम ने बताया कि पांचों ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत सचिव द्वारा वेब लाइन सर्वे के अनुसार परिवारों की कुल संख्या तथा प्रधान द्वारा बताई गई वास्तविक परिवारों की कुल संख्या में अंतर मिला। इसी प्रकार परिवार रजिस्टर में अंकित परिवारों की संख्या, वेबलाइन सर्वे के अनुसार कुल परिवारों की संख्या, कुल राशनकार्ड धारकों की संख्या, निजी शौचालयों की संख्या तथा सरकार द्वारा बनवाए गए शौचालयों की कुल संख्या वर्तमान में रह रहे परिवारों के आंकड़े एक-दूसरे की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं। 
    शौचालयों की गुणवत्ता के संबंध में जांच टीम ने बताया कि ग्रामों में अधिकांश शौचालय मानक के अनुरूप नहीं बनाए गए हैं। दो गड्ढों के स्थान पर एक ही गहरा गड्ढा बनवाया गया है। अधिकांश शौचालयों में जंक्शन चैंबर एवं रोशनदान भी नहीं पाए गए और न ही पानी की टंकी का निर्माण किया गया है। ग्रामीणों द्वारा शौचालयों की रंगाई-पुताई एवं यूनीकोडिंग भी नहीं की गई है। इस कारण उनकी जियो टैगिंग भी नहीं हो सकी है।

     

    प्राचार्य
    (डाॅ0 जमील अहमद)
    जी.एफ. काॅलेज, शाहजहांपुर

    Posted by GF College / Posted on Dec 13, 2018

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