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  • गांधी फ़ैज़-ए-आम काॅलेज में आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ ;प्फ।ब्द्ध के तत्वावधान में आयोजित वार्षिकोत्सव ‘गैलेक्सी 2018-19’ के छठे दिन जनपद स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता सहित मुशायरा व कवि सम्मेलन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

    दिनांक: 25 दिसंबर 2018
     
    गांधी फ़ैज़-ए-आम काॅलेज में आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ ;प्फ।ब्द्ध के तत्वावधान में आयोजित वार्षिकोत्सव ‘गैलेक्सी 2018-19’ के छठे दिन जनपद स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता सहित मुशायरा व कवि सम्मेलन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। साथ ही वर्ष 2018 में विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित की गई प्रतियोगिताओं में विजयी रहे छात्र-छात्राओं को प्राचार्य प्रोफेसर जमील अहमद ने स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
    ‘सोशल मीडिया: वरदान या अभिशाप’- विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता में जनपद के विभिन्न महाविद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किए। पक्ष में जी0एफ0 कालेज की किंजा ख़ान एवं ललित हरि मिश्रा को प्रथम स्थान मिला जबकि एस.एस. पीजी काॅलेज के वंशिका शर्मा और वानी सक्सेना को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। तीसरे स्थान पर धर्मजीत सिंह पीजी काॅलेज मिर्जापुर के फ़रज़ान अज़ीज़ और शुभा शुक्ला को तथा सत्यपाल डिग्री काॅलेज की छात्रा वैशाली वर्मा तथा ओवैस ख़ान रहे। कार्यक्रम समन्वयक डाॅ0 अब्दुल मोमिन और निर्णायक डाॅ0 मो0 साजिद ख़ान, डाॅ0 युक्ति माथुर और डाॅ0 मोहम्मद नसीम रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 मंसूर सिद्दीक़ी ने किया।
    दोपहर बाद हुए मुशायरा और कवि सम्मेलन ने श्रोताओं का ख़ूब मन मोहा। ख़लिद अलवी ने सुनाया-‘जिंदगी हरफे तलब कैसे ज़बां तक आए। मुझको है फुरसते यक लम्हा तुझे काम बहुत। वसीम मीनाई ने कहा-‘तीर से हमको न तलवार से डर लगता है। मुफलिसी तेरे हर इक वार से डर लगता है।’ राशिद राही ने गुनगुनाया-‘क्यों आ रहे हैं हाल मेरा पूछने को लोग। क्या आज़मा रहे हैं मेरे हौसले को लोग?’ अख़्तर शाहजहांपुरी ने सुनाया-‘रोशनी भीख में नहीं मिलती, शाम से सुबह तक जला हूँ मैं।’ डाॅ0 नईम कासगंजवी ने कहा-‘कुफरो ईमां का मेरे शहर में चर्चा भी न था, हो न हो अहले सियासत ने यह साज़िश की है।’ हास्य कवि दिनेश रस्तोगी ने व्यंग्य करते हुए कहा-‘हंसराम दिल्ली पहुंच, हुआ सयाना गिद्ध। घर का जागी जोगिया, आन गांव का सिद्ध।’ अजय गुप्त ने गुनगुनाया-‘सूर्य जब-जब थका-हारा ताल के तट पर मिला! सच बताऊं बेटियों के बाप-सा मुझको लगा।’ सुदर्शन सलिलेश ने पढ़ा-‘बाढ़ के जैसा दर्द का दरिया बहे अच्छा नहीं। आदमी औकात से ज्यादा रहे अच्छा नहीं।’ विजय ठाकुर ने लोकगीत की पंक्तियां पढ़ीं-‘एकु दीबो रुपइया तुमहूं दिबरा। हमरी चिठिया में लिख दे दुई अखरा।’ दीपक वर्मा कंदर्प ने गाया-‘कुछ न कहना, कुछ न कहना, कुछ न कहना चाहिए। सिर्फ सुनना, सिर्फ सुनना, सिर्फ सुनना चाहिए।’’ इसके अलावा ललित हरि मिश्रा, अभय मिश्र, अनिल सिंह, सोनल, आदि ने भी अपनी कविताएँ सुनाईं। प्राचार्य प्रोफेसर जमील अहमद ने शायरों और कवियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर उनका सम्मान किया। मुशायरे की निज़ामत डाॅ0 मंसूर अहमद ने की। 
    इस अवसर पर डाॅ0 नसीमुस्शान खां, डाॅ0 अब्दुल मोमिन, डाॅ0 नईमुद्दीन सिद्दीक़ी, डाॅ0 मो0 तैयब, डाॅ0 अब्दुल सलाम, डाॅ0 ख़लील अहमद, डाॅ0 मुजीबुदद्ीन, सैयद अनीस अहमद, डाॅ0 सुहेल अख़्तर नक़वी, डाॅ0 मोहम्मद साजिद ख़ान, डाॅ0 जी0ए0 क़ादरी, डाॅ0 सलीम अहमद ख़ान, डाॅ0 रिफ़ाक़त हुसैन, डाॅ0 मसीउल्लाह, डाॅ0 शमशाद अली, डाॅ0 इरम जहां, डाॅ0 नसीम अख़्तर, डाॅ0 परवेज़ अहमद, डाॅ0 अकील खान, डाॅ0 कहकशां बेगम, डाॅ0 शोएब, डाॅ0 अजहर सज्जाद, डाॅ0 अरशद अली, डाॅ0 सईद अख़्तर, डाॅ0 रियाज़, डाॅ0 अब्दुल मोहेमन सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय के शिक्षक मौजूद रहे।
     
    प्राचार्य
    गांधी फ़ैज़-ए-आम काॅलेज, 
    शाहजहाँपुर  

    Posted by GF College / Posted on Dec 25, 2018

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